वेदिक संस्कृति में जन्म दिन महोत्सव एवं शादी की वर्षगांठ का विशेष महत्त्व है क्यूंकि हम प्रति दिन अपने पंचतत्वों को एवं शुभ कर्मों को इस्तेमाल करते रहते हैं जिस कारण इनका संचित खजाना खाली होता जाता है इन दोनों पर्वों पर शास्त्र अनुसार कुछ विशेष पूजा आराधना से इस कमी को दोबारा पूर्ण किया जा सकता है और हम पहले से ज्यादा उत्साह-शक्ति के द्वारा कार्य करते हैं विधि निम्न प्रकार है

सर्वप्रथम इस दिन विशेष से लगभग एक सप्ताह पूर्व केन्द्र से संपर्क करें ताकि हम आपको वर्ष फल के अनुसार क्या दान करना है बता देंगे (निशुल्क)

जन्मदिन के दिवस क्या करें

सर्व प्रथम प्रातः श्नान के पश्चात माता-पिता एवं अन्य बड़ों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ग्रहण करें फिर अपने दिवंगत पितरों को स्मरण करें यदि कोई चित्र हो उन्हें पूर्ण श्रध्हा से प्रणाम करें

२.पितरों की तृप्ति एवं प्रसन्नता के लिए पानी का लोटा धुप-दीप, फल,मिठाई,दूध,चावल,चीनी एवं दक्षिणा सामने रखें हाथ में पानी लेकर अपना नाम गोत्र बोल कर संकल्प करें कहें में आज अपने जन्म /वर्षगांठ पर्व पर अपने पितरों की तृप्ति एवं प्रसन्नता की लिए ये अन्न-जल प्रदान कर रहा हूँ आप प्रसन्न मन से स्वीकार करें एवं मुझे जीवन में सब सुख-सुविधा प्रदान करें आरोग्यता प्रदान करें एवं में अपने कर्तव्यों को पूर्ण कर सकूँ ऐसा आशीर्वाद प्रदान करें एवं आप सदा तृप्त एवं प्रसन्न रहें और हाथ का पानी जमीन पर छोड़ दें धरती को प्रणाम करें

३.अब केन्द्र द्वारा बताये गए मुन्थेश एवं वर्षेश ग्रह शांति के निमित्त सामग्री एवं काले उरद,चावल,चनादाल,मूंग साबुत,लाल मसूर की दाल पञ्च तत्वों की पूर्ती के निमित्त  दान करें दक्षिणा सहित तत्पश्चात सामर्थ्य अनुसार कुछ धन राशि कुलदेवी एवं अपने इष्ट देव एवं गुरु के प्रति दान करें शाम के समय अपनी उम्र की गिनती में एक अधिक जोड़ कर स्वस्तिक या ओंकार स्वरूप में स्थित कर दीप दान घर की आँगन में या कही पीपल वृक्ष के निचे दान करें कुछ प्रशाद एवं दक्षिणा भी रखें

४.इष्ट भगवान को मानते हुए संकल्प करें शुभ कर्म करूँगा,किसी का बुरा नहीं करूँगा शास्त्र अनुसार वेदिक जीवन गुजरूँगा कर्तव्य पालन में तत्पर रहूँगा माता पिता की सेवा सम्मान करूँगा रात्रि काल में शुद्ध मन से परिवार एवं बंधू-बांधवों सहित सात्विक भोजन ग्रहण करें  

 कुछ विशेष :---जन्म दिन से बीते साल हमने अपने पञ्च तत्वों को इस्तेमाल किया इन्हें पुनर्जीवित एवं पुष्ट करने के लिए जरूरी है आगामी वर्ष में इनसे सम्बंधित दानकरें गरीब एवं असहाय लोगो की सहायता करें
बीते साल मन सहित पांच कर्मेन्द्रियाँ एवं पांच ज्ञानेन्द्रिया का इस्तेमाल किया जिस द्वारा शुभ-अशुभ करम संग्रह हुआ ये कहीं पुनर्जन्म का कारण न बनें अतः आगामी वर्ष में अधिक से अधिक शुभ करम करें भोतिक अन्न-जल दान से कर्मेन्द्रियों सहित शरीर पुष्ट होता है ज्ञान-साहित्य के दान से ज्ञानेन्द्रियाँ पुष्ट होती हैं एवं
ये सभी पञ्च महायग्य के अंतर्गत आतें हैं अतः हमेशा वेदिक संस्कृति के अंतर्गत पञ्च महायज्ञ युक्त जीवन शैली को जीवन में अपनाएं एवं इस जन्म दिन/वर्षगाँठ पर संकल्प करें आप अधिक से अधिक इस शैली का प्रसार-प्रचार करेंगे