इस वर्ष २८/०८/२०१३ दिन बुधवार तिथि अष्टमी अर्धरात्रि नक्षत्र रोहणी हर्ष योग में अति शुभ एवं दुर्लभ है और पद्म पुराण के अनुसार भाद्र कृष्ण अष्टमी बुधवार एवं रोहणी नक्षत्र युक्ता होने पर प्रेत योनी को प्राप्त भी पितरों को एवं अनेक कुलों को तारने वाली होती है अतः इस दिन विशेष पर सुबह उठ कर अन्तः-बाह्य शोअच के उपरान्त अपने पितरों को जल एवं अन्न के द्वारा तृप्त करें ( www.prashaktivedicastrology.org click for method) श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का संकल्प करें भगवान श्री कृष्ण जी का माँ राधा सहित सामर्थ्य अनुसार पूर्ण वैभव के साथ अंतर्मन को प्रभु चरणों में स्थिर कर पंचोपचार/षोडशोपचार पूजन करें ओं नमो भगवते वासुदेवाय नमः का अधिक से अधिक जाप करें ! रात्रि काल तक व्रत सहित श्री कृष्ण शरणम-मम का निरंतर जाप करें सांय काल में पीपल वृक्ष के निचे  पीपल के पांच पत्तों पर अलग-अलग पनीर एवं दूध से बनी सफेद मिठाई + दक्षिणा रख कर पीपल में मीठा जल दूध+शहद+शक्कर+घी गंगाजल युक्त पितरों का ध्यान करते हुए धार सहित अर्पण करें घी की जोत जलाएं एवं “ओं सर्वपित्री दोष निवार्नाये क्लेश हन्न हन्न - सुख-शांति देहि देहीत फट स्वाहा” मंत्र का कुछ जाप करें.......अर्धरात्रि को नहा कर नारियल या खीरे को धोकर भगवान को समर्पित करें इनमें परात्पर ब्रह्म भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ मान कर पूजन आरती करें दूध,दहीं,माखन,मिश्री,फल,मिठाई,एवं पंजीरी का भोग समर्पित करें फिर दिन भर का पूजन व्रत भगवान जी के चरणों में अर्पित कर आत्म कल्याण की भावना करें और निवेदित प्रशाद ग्रहण करें