श्री गणेश जी के बारह नाम 

 श्री गणेश का लोकप्रिय संकटनाशन स्तोत्र :
प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम।
भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये।।1।।
प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम।
तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम।।2।।
लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम् ।।3।।
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम।।4।।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर:।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो।।5।।
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ।।6।।
जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।।7।।
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत:।।8।।
।।इति संकटनाशनस्तोत्रं।।

 

 गणेशजी की आराधना बहुत मंगलकारी मानी जाती है। उनके ‍भक्त विभिन्न प्रकार से उनकी आराधना करते हैं। अनेक श्लोक, स्तोत्र, जाप द्वारा गणेशजी को मनाया जाता है। इनमें से गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ विशेष कल्याणकारी है। ।
।।श्री गणपति अथर्वशीर्ष।।
ॐ नमस्ते गणपतये।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि
त्वमेव केवलं कर्ताऽसि
त्वमेव केवलं धर्ताऽसि
त्वमेव केवलं हर्ताऽसि
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि
त्व साक्षादात्माऽसि नित्यम्।।1।।
ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि।।2।।
अव त्व मां। अव वक्तारं।
अव श्रोतारं। अव दातारं।
अव धातारं। अवानूचानमव शिष्यं।
अव पश्चातात। अव पुरस्तात।
अवोत्तरात्तात। अव दक्षिणात्तात्।
अवचोर्ध्वात्तात्।। अवाधरात्तात्।।
सर्वतो मां पाहि-पाहि समंतात्।।3।।
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मय:।
त्वमानंदमसयस्त्वं ब्रह्ममय:।
त्वं सच्चिदानंदाद्वितीयोऽसि।
त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।।4।।
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते।
सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।
सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति।
त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभ:।
त्वं चत्वारिवाक्पदानि।।5।।
त्वं गुणत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।
त्वं देहत्रयातीत:। त्वं कालत्रयातीत:।
त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यं।
त्वं शक्तित्रयात्मक:।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं
रूद्रस्त्वं इंद्रस्त्वं अग्निस्त्वं
वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं
ब्रह्मभूर्भुव:स्वरोम्।।6।।
गणादि पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।
अनुस्वार: परतर:। अर्धेन्दुलसितं।
तारेण ऋद्धं। एतत्तव मनुस्वरूपं।
गकार: पूर्वरूपं। अकारो मध्यमरूपं।
अनुस्वारश्चान्त्यरूपं। बिन्दुरूत्तररूपं।
नाद: संधानं। सं हितासंधि:
सैषा गणेश विद्या। गणकऋषि:
निचृद्गायत्रीच्छंद:। गणपतिर्देवता।
ॐ गं गणपतये नम:।।7।।
एकदंताय विद्महे।
वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दंती प्रचोदयात।।8।।
एकदंतं चतुर्हस्तं पाशमंकुशधारिणम्।
रदं च वरदं हस्तैर्विभ्राणं मूषकध्वजम्।
रक्तं लंबोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।
रक्तगंधाऽनुलिप्तांगं रक्तपुष्पै: सुपुजितम्।।
भक्तानुकंपिनं देवं जगत्कारणमच्युतम्।
आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृते पुरुषात्परम्।
एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वर:।।9।।
नमो व्रातपतये। नमो गणपतये।
नम: प्रमथपतये।
नमस्तेऽस्तु लंबोदरायैकदंताय।
विघ्ननाशिने शिवसुताय।
श्रीवरदमूर्तये नमो नम:।।10।।
एतदथर्वशीर्ष योऽधीते।
स ब्रह्मभूयाय कल्पते।
स सर्व विघ्नैर्नबाध्यते।
स सर्वत: सुखमेधते।
स पञ्चमहापापात्प्रमुच्यते।।11।।
सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति।
प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।
सायंप्रात: प्रयुंजानोऽपापो भवति।
सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति।
धर्मार्थकाममोक्षं च विंदति।।12।।
इदमथर्वशीर्षमशिष्याय न देयम्।
यो यदि मोहाद्दास्यति स पापीयान् भवति।
सहस्रावर्तनात् यं यं काममधीते तं तमनेन साधयेत्।13।।
अनेन गणपतिमभिषिंचति
स वाग्मी भवति
चतुर्थ्यामनश्र्नन जपति
स विद्यावान भवति।
इत्यथर्वणवाक्यं।
ब्रह्माद्यावरणं विद्यात्
न बिभेति कदाचनेति।।14।।
यो दूर्वांकुरैंर्यजति
स वैश्रवणोपमो भवति।
यो लाजैर्यजति स यशोवान भवति
स मेधावान भवति।
यो मोदकसहस्रेण यजति
स वाञ्छित फलमवाप्रोति।
य: साज्यसमिद्भिर्यजति
स सर्वं लभते स सर्वं लभते।।15।।
अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग्ग्राहयित्वा
सूर्यवर्चस्वी भवति।
सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमासंनिधौ
वा जप्त्वा सिद्धमंत्रों भवति।
महाविघ्नात्प्रमुच्यते।
महादोषात्प्रमुच्यते।
महापापात् प्रमुच्यते।
स सर्वविद्भवति से सर्वविद्भवति।
य एवं वेद इत्युपनिषद्।।16।।
अथर्ववेदीय गणपतिउपनिषद
         !!!   जय गणेश जी   !!!

18 जनवरी वीरवार श्रवण नक्षत्र को गुप्त नवरात्र शुरू हो जायेंगे हर गृहस्थी को इन दिनों हर रोज नहा कर तर्पण श्राद्ध करके पूजा स्थल पर  घी की जोत जलाएं यथा सामर्थ्य प्रशाद अर्पित करें सुखासन में बैठ कर दुर्गा सप्तशती से श्री दुर्गा अष्टोत्तर नाम स्तोत्र के 9 पाठ करें एक पाठ तंत्रोक्त देवी सूक्त का करें माँ जगदम्बा से अपने घर की सुख-शांति की कामना प्रार्थना करें !!
जिन कन्याओं के विवाह में विलम्ब हो रहा है या गृहस्थ जीवन में कलह-क्लेश की स्थिति है वेह सभी इस उक्त कर्म के साथ एक पान के डंडी युक्त पान के पत्ते पर साबुत हल्दी एक की गाठी+पांच सुपारी+एक जनेऊ भगवान् शिवलिंग पर चढ़ाएं मिश्री युक्त दूध से अभिषेक करें एवं ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ! शरन्य त्रियाम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते !! मन्त्र की एक माला रोज करें !!
जिन घरों में बच्चों का पढने में मन नहीं लगता परीक्षा में उम्मीद से कम नंबर आते हैं उनके लिए माँ या पिता उक्त प्रथम युक्ति से माँ की पूजा करें बच्चों की पढाई एवं सफल सुखमय जीवन के लिए इसके साथ श्री गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें वसंत पंचमी के दिन बच्चों से सफेद कागज पर लाल पेन से गणेश जी के बारह नामों वाला स्तोत्र लिखवायें घर पर गणेश जी 21 बूंदी के लड्डू का भोग लगायें धुप दीप के साथ गणेश जी की पूजा करवाएं फिर स्तोत्र लिखे आठों कागज गणपति जी को समर्पित करदें साथ में 8 की संख्यां में दक्षिण अर्पित करें प्रणाम करें फिर बच्चे के हाथों एक स्तोत्र लिखा कागज दो लड्डू एवं दक्षिणा 8 अलग-अलग ब्राह्मणों को दान करवाएं आशीर्वाद दिलवाएं बचे हुए पांच लड्डू घर के सभी सदस्य मिलबांट कर ग्रहण करें 
यह पूजन क्रिया वैदिक मार्ग के अंतर्गत साधारण गृहस्थों के लिए हैं साधकों का तन्त्र साधकों के लिए साधना कुछ अलग होती है उसके लिए आप सीधे संपर्क कर सकते हैं !!
अध्यात्मिक चिन्तक वैदिक महर्षि डॉ बलविन्द्र अग्रवाल 09779200432,whatsapp. 09041414411.