दश-महाविद्या

 

माँ पराशक्ति की कृपा प्राप्त करने का सुगम उपाय
सम्पूर्ण जगत की आदि कारन पालन एवं संहार शक्ति को अनेक नामों से जाना जाता है जिनमे मुख्य हैं महाकाली,महालक्ष्मी,महासरस्वती,दुर्गा,पारवती,इन्हीं की शक्ति से संचालित हैं नवदुर्गा अर्थात शैलपुत्री,ब्रह्मचारिणी,चंद्रघंटा,कुष्मांडा,स्कंदमाता,कात्यायनी,कालरात्रि,महागोरी,सिध्हिदात्री ! इन्हीं से संचालित हैं दश्महविद्याएं अर्थात दस महाविद्याओं के मंत्र इस प्रकार हैं-
पहली महाविद्या ।।काली।। मंत्र- ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हुं हुं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
दूसरी महाविद्या ।।तारा।।मंत्र- ऊँ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् स्वाहा।।
तीसरी महाविद्या ।।छिन्नमस्ता।। मंत्र- ऊँ श्रीं ह्रीं क्लीं ऎं वज्रवैरोचनीयं हुं हुं फट् स्वाहा।
चौथी महाविद्या ।।षोड़शी।। मंत्र- ऊँ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं स्वाहा।
पांचवीं महाविद्या ।। भुवनेश्वरी।। मंत्र- ऊँ ऎं ह्रीं श्रीं स्वाहा।
छठवीं महाविद्या ।।त्रिपुर भैरवी।। मंत्र- ऊँ ह स रैं ह स क ल रीं ह स रौं स्वाहा।
सातवीं महाविद्या ।।धूमावती।। मंत्र- ऊँ धूं धूं धूमावती ठ: ठ: स्वाहा।
आठवीं महाविद्या ।।बागलामुखी।। ं ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुश्तानाम मुखं पदम 
स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धि विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा। ॐ
नौवीं महाविद्या ।।मातंगी।। मंत्र- ऊँ ह्रीं, क्लीं हुं मातंग्यै फट् स्वाहा।
दसवीं महाविद्या ।।कमला।। मंत्र- ऊँ ऎं ह्री, श्रीं क्लीं ह सौ जगत प्रसूत्यै स्वाहा।

यहाँ हम कलिकाल में सद-गृहस्थ की स्थिति को देखते हुए सरल एवं सटीक विधि दे रहे हैं हमारा उद्देश्य है हर साधक परिस्थिति अनुसार इश्वर अराधना कर जीवन धन्य कर सकें अतः अश्विन शुक्ल पक्ष में अनुष्ठान प्रारंभ करें "नवरात्र पूजन" विधि अनुसार षट्कर्म पूर्ण कर माँ पराशक्ति की स्थापना करें षोडशोपचार पूजन करें फिर प्रतिपदा इत्यादि तिथि से पहली से दशमी महाविद्या के मन्त्रों की 9-9 की संख्या में माला जप करें आदि एवं अंत में श्री सिद्ध कुजिका स्तोत्र का पाठ करें अंत में श्री देव्या अपराध क्षमापन स्तोत्र का पाठ करें सभी पूजा फल माँ के चरणों में समर्पित कर दें एकादशी से त्रियोदिशी तक नित्य प्रति इसी प्रकार दशमी महाविद्या के मन्त्र का जाप करें चतुर्दशी को समस्त दश महाविद्या शक्ति की प्रतिष्ठा हेतु सभी मन्त्रों की एक-एक माला के हिसाब से हवन - तर्पण-मार्जन विधि एवं ब्राह्मण एवं कन्या पूजन करें !! 
......सर्वप्रथम शास्त्र को प्रमाण मान कर इस सभी परम सत्य को समझें आत्मसात करें विशवास करें यदि मानव द्वारा समझ कर विशवास करोगे तो कभी न कभी अविश्वास जागृत हो सकता है अतः इन “पराशक्ति” का सामर्थ्य जान कर इनकी कृपा प्राप्ति का साधन सफल हो पायेगा अन्यथा संभव नहीं !
श्री मददेवी भगवत के ४६ वें अध्याय के अनुसार सात्विक भाव से पूजा करने वाले साधक को सामग्री भी सात्विक ही लेनी चाहिए उन्हें न तो बलि अर्पण करनी चाहिए न ही मांस-मदिरा बस पराम्बा की प्रसन्नता के लिए समाहितचित्त होकर उत्सव भरे वातावरण में विविध भोग सामग्री पूजा उपचार, जप,तप,स्तुति,यज्ञ, कन्या पूजन तथा ब्राह्मण पूजन आदि के द्वारा माँ “पराशक्ति”की भक्ति भाव सहित पूर्ण समर्पण भाव से पूजा करनी चाहिए यह पूजन दुष्ट शत्रुओं का नाश करने वाला,धन-धान्य,सुख-समृधि,सम्मान,आरोग्यता,प्रसन्नता,एवं इच्छित फल देने वाला है !इस पूजा को करने वाला संग्राम में विजय और गृहस्थ में पुत्र-पोत्र तथा स्त्री सम्बन्धी उत्तम एहिक सुख एवं पारलोकिक सुख प्राप्त करके अंत में परम पद अर्थात मोक्ष को प्राप्त होता है