इस वर्ष यह पुण्य पर्व 30 सितम्बर शनिवार उत्तरा षाढ़ नक्षत्र में मनाया जायेगा क्यूंकि श्रवण नक्षत्र दशमी तिथि में रात्री गत है जो प्रशस्त नहीं माना जाता अतः शनिवार को ही प्रेम पूर्वक दशहरा पूजन शास्त्र सम्मत रहेगा !!

यह पर्व अश्विन शुक्ल दशमी को श्रवण नक्षत्र में मनाया जाता है इसमें यदि सम्पूर्ण या आंशिक योग श्रवण नक्षत्र +प्रदोष काल+नवमी युक्त दशमी हो तो उत्तम है
इस दिन विशेष पर मुख्यतया माँ अपराजिता,शमी पूजन एवं नवरात्र व्रत का पारना किया जाता है पूजा में घर के उत्तर दिशा /ईशान दिशा के कोन कोने में साफ की हुए भूमिं पर जल का छिडकाव कर चावल से वेदी बना कर सर्वप्रथम भगवान् श्री राम जी का परिवार सहित फोटो स्थापित करें इसके सामनें गोबर से या आटे से “रावण” के दस सिरों का निर्माण करें लक्ष्मी गणेश जी नवग्रह आदि देवों को भी स्थान प्रदान करें फिर प्रथम पूज्य श्री गणेश जी को चार बार जल अर्पण करें तिलक लगायें धुप दीप दिखाएं चावल-भात एवं दहीं का मीठा नैवेद्य अर्पण करें पुष्प चढ़ाएं इसी प्रकार नवग्रहों इष्ट देव कुलदेव स्थान देव क्षेत्रपाल देव जी का भी पूजन स्मरण करें फिर श्री राम जी का माँ सीता जी सहित,भारत जी,लक्ष्मण जी,शत्रघ्न जी का सपत्नीक पूजन करें फिर श्री हनुमान जी का पूजन करें अंत में “रावण” जी का पूजन करें सभी सिरों पर अमावस्या को उगाये हुए जों नयी रूई,पके चावल,दही,बूरा,फूल,मोली,जनेऊ,दक्षिणा चढ़ाएं धुप दीप दिखाएं इन से प्रार्थना करें  “श्री राम रक्षा स्तोत्र” “श्री स्तुति” एवं श्री राम जी की आरती पाठ करें !! विदित है रावण ज्ञानवान वेदज्ञाता ब्राह्मण ऋषि पुत्र थे परन्तु क्रियमाण (वर्तमान) कर्मों के कारन अशस्तोक्त जीवन क्रियाओं के कारन समाज के निन्दित प्राणी मने गये परन्तु उनका चरित्र एवं जीवन शैली से हम बहुत कुछ सीख ले सकते हैं आज के दिन इसी लिए हम स्मरण एवं पूजा करते हैं कामना करते हैं उनके दुर्गुण हमसे दूर रहें उनके सद्गुण हम में वास करें परम्परा अनुसार इस दिन वैश्य अपनी बही-बसने की ,क्षत्रिय अपने आयुधों की, किसान अपने हल एवं अन्य ओजारों की,ब्राह्मण ग्रंथों की पूजा भी स्वस्तिक बना कर करते हैं क्यूँ की इस दिन पर खेतों से नया अनाज घरों में आजाता है अतः इसी का दान एवं सेवन किया जाता है अंत में सांयकाल में बुराई रूप तीनों पुतलों को जला कर परिवार सहित लंका विजय का उत्सव मनाया जाता है और स्थापित समग्री को शुद्ध स्थान पर बदल दिया जाता है ....हरी ॐ तत्सत