माँ पराशक्ति की कृपा प्राप्त करने का सुगम उपाय
......सर्वप्रथम शास्त्र को प्रमाण मान कर इस सभी परम सत्य को समझें आत्मसात करें विशवास करें यदि मानव द्वारा समझ कर विशवास करोगे तो कभी न कभी अविश्वास जागृत हो सकता है अतः इन “पराशक्ति” का सामर्थ्य जान कर इनकी कृपा प्राप्ति का साधन सफल हो पायेगा अन्यथा संभव नहीं !
श्री मददेवी भगवत के ४६ वें अध्याय के अनुसार सात्विक भाव से पूजा करने वाले साधक को सामग्री भी सात्विक ही लेनी चाहिए उन्हें न तो बलि अर्पण करनी चाहिए न ही मांस-मदिरा बस पराम्बा की प्रसन्नता के लिए समाहितचित्त होकर उत्सव भरे वातावरण में विविध भोग सामग्री पूजा उपचार, जप,तप,स्तुति,यज्ञ, कन्या पूजन तथा ब्राह्मण पूजन आदि के द्वारा माँ “पराशक्ति”की भक्ति भाव सहित पूर्ण समर्पण भाव से पूजा करनी चाहिए यह पूजन दुष्ट शत्रुओं का नाश करने वाला,धन-धान्य,सुख-समृधि,सम्मान,आरोग्यता,प्रसन्नता,एवं इच्छित फल देने वाला है !इस पूजा को करने वाला संग्राम में विजय और गृहस्थ में पुत्र-पोत्र तथा स्त्री सम्बन्धी उत्तम एहिक सुख एवं पारलोकिक सुख प्राप्त करके अंत में परम पद अर्थात मोक्ष को प्राप्त होता है
माँ पराशक्ति पूजन का संक्षिप्त पूजा विधान इस प्रकार है :-
सर्व प्रथम नहा कर पित्री तर्पण श्राद्ध इत्यादि अवश्य करणीय कर्म पूर्ण कर पहले से बने पूजा स्थान पर या घर के इशान कोण में चोकी पर पीला कपडा बिछा कर माँ दुर्गा जी का फोटो स्थापित करें उसके आगे किसी बर्तन में गीली मिटटी बिछा कर उस पर मिटटी या पीतल का लोटा पानी भर कर रखें उस पानी में लॉन्ग,इलाची,सुपारी,चांदी का सिक्का या टुकड़ा,सर्व ओषधि या हल्दी एवं गंगा जल डालें अब इसके बीच कुछ आम के पत्ते रख लें इसके ऊपर प्लेट में पिली सरसों भर कर उस पर लाल कपडे में लिप्त हुआ पानी वाला सुन्दर नारियल मोली से बाँध कर लम्बाई में स्थापित करें उस पर जनेऊ रखें फूल माला रखें अब इस कलश के आगे एक प्लेट में दो सुपारी गोरी माता एवं गणपति जी के स्वरूप में मोली लपेट कर रखें दोनों पर जनेऊ+मोली रखें इसके साथ ही नो सुपारी नवग्रहों के रूप में रखें इन अभी पर अलग अलग मोली एवं जनेऊ रखें माता जी को प्रशाद में नारियल रखें गुड पर घी लगा कर रखें हर् दिन प्रशाद में किशमिश निवेदित करें विशेष पूजा में प्रतिपदा तिथि को घी से माता जी की पूजा करें घी किसी ब्राह्मण को दान दें इसी प्रकार दूसरी को शक्कर,तीसरे को दूध,चोथे को गुड+ आते के पुए, पांचवे को केला,षष्टी को शहद,सप्तमी को गुड,अश्त्मिन को नारियल,नवमीं को लावा खील,दशमीं को काले तिल,एकादशी को दहीं,द्वादशी को चिडवा,त्रयोदशी को भुना चना,चतुर्दशी को गेहूं के सत्तू,एवं पूर्णिमा को खीर का नेवेद्य अर्पण करें एवं ब्राह्मण तथा कन्याओं को खिलाएं इस प्रकार प्रतिदिन के हिसाब से नेवेद्य अर्पण कर श्री दुर्गा सप्तशती का सामर्थ्य अनुसार पाठ एवं नवरं मन्त्र का जाप करें जिस की विधि पहले लिखी जा चुकी है पूजा उपरान्त सारी पूजा माँ चरणों में अर्पण करें जाने-अनजाने वर्तमान या प्रारब्ध वश हुए पापों के लिए दंडवत होकर क्षमा मांगें
समय अनुसार करें अपनी पूजा निर्धारित :-१.सम्पूर्ण श्री शप्तसती पाठ (गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा लिखित)
हनुमान चालीसा,श्री रामस्तुति,श्री भैरव स्तोत्र,दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र-संकल्प-शापोधार-सप्तश्लोकी-कवच-अर्गला-कीलक !कवच (जहां नाभि से नीचे स्पर्श करें हाथ धो लें)आगे का क्रम पुस्तक अनुसार तीनो शक्तियों के ध्यान के बाद पंचोपचार पूजन करें हर् अध्याय के शुरू में ध्यान के बाद माँ का ध्यान कर संक्षिप्त पूजन करें शंख ध्वनि करें तीनों रहस्यों के बाद पुनः शापोधार करें सिध्कुंजिका का पाठ करें क्षमा प्रार्थना करें अंत में देव्या अपराध क्षमापन् स्तोत्र का पाठ कर दंडवत प्रणाम कर अपने को संसार से डरा हुआ मान कर पूर्ण समर्पण युक्त होकर कुछ देर माँ के चरणों में बिताएं सारी पूजा माँ चरणों में समर्पित कर दें !
२.हनुमान चालीसा,श्री रामस्तुति,श्री भैरव स्तोत्र,दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र-संकल्प-सप्तश्लोकी-कवच-अर्गला-कीलक !कवच (जहां नाभि से नीचे स्पर्श करें हाथ धो लें) श्री देव्याअथर्वशीर्ष का पाठ करें नवरं विधि सहित करें तीनो शक्तियों के ध्यान के बाद पंचोपचार पूजन करें-नवार्ण मन्त्र सामर्थ्य अनुसार निश्चित मात्र में जपें-सिध्कुंजिका का पाठ करें क्षमा प्रार्थना करें अंत में देव्या अपराध क्षमापन् स्तोत्र का पाठ कर दंडवत प्रणाम कर अपने को संसार से डरा हुआ मान कर पूर्ण समर्पण युक्त होकर कुछ देर माँ के चरणों में बिताएं सारी पूजा माँ चरणों में समर्पित कर दें  
३. हनुमान चालीसा,श्री रामस्तुति,श्दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र-सप्तश्लोकी- श्री देव्याअथर्वशीर्ष का पाठ करें नवार्ण मन्त्र विधि सहित करें तीनो शक्तियों के ध्यान के बाद पंचोपचार पूजन करें-नवार्ण मन्त्र सामर्थ्य अनुसार निश्चित मात्र में जपें-सिध्कुंजिका का पाठ करें क्षमा प्रार्थना करें अंत में दंडवत प्रणाम कर अपने को संसार से डरा हुआ मान कर पूर्ण समर्पण युक्त होकर कुछ देर माँ के चरणों में बिताएं सारी पूजा माँ चरणों में समर्पित कर दें !
.४.हनुमान चालीसा,श्री रामस्तुति, श्री देव्याअथर्वशीर्ष का पाठ करें श्री रामचरितमानस का पाठ करें जो नवरात्रों में पूरा हो जाये-सिध्कुंजिका का पाठ करें क्षमा प्रार्थना करें ! पाठ कर दंडवत प्रणाम कर अपने को संसार से डरा हुआ मान कर पूर्ण समर्पण युक्त होकर कुछ देर माँ के चरणों में बिताएं सारी पूजा माँ चरणों में समर्पित कर दें !
कुछ सावधानियां जो जरूरी है ! सर्व प्रथम मन से ये निकाल दें की यदि कुछ गलत पढ़ा गया या गलती हो गयी तो माता जी रुष्ट हो जायेंगे ऐसा कदापि नहीं होगा क्यूंकि इश्वर कभी नाराज नहीं होते पुत्र कुपुत्र हो सकता है माता कुमाता नहीं हो सकती ! दूसरी बात भक्ति युक्त आत्मकल्याण के लिए की जाने वाली पूजा में कोई दोष नहीं लगता स्वामी राम किशन परम हंस जी ने माँ काली को जूठी रोटी खिला दी थी वहाँ के राजा इस बात के साक्षी है !
पूर्ण पाठ करना मतलब अनुष्ठान करना हुआ ! इस समय साधक माँ के समर्पित होता है उसका हर् करम शुध्ह सात्विक माँ समर्पित होना जरूरी है ! इन नों दिनों में भूमि शयन करें,ब्रह्मचर्या का पालन करें,शेव करना नाख़ून काटना साबुन लगा कर नहाना बाजारी दन्त मंजन लगाना लंबी यात्रा करना घर में अखंड जोत के जलते घर अकेला छोड़ सब का घर से बहार जाना बाजार में मिलने वाले फलाहारी पदार्थ खानें वर्जित हैं पूजा करते समय धोती,लंगोट,एक अधोवस्त्र धारण करें ! सर ढका हुआ हो आसन न बहुत ऊँचा हो न नीचा हो ! पूजा का पानी छना हुआ हो ! आसन भी सूती और कुश का हो लाल रंग अति उत्तम रहता है फिजूल की गप-शप या दूरदर्शन देखने,गलत नास्तिक साथियों के साथ बैठने से मन का भटकाव बढ़ जाता है और ध्यान भगवान से हट कर दुनियावी हो जाता है क्यूंकि ये सभी यम-नियम केवल मन को साधने के लिए ही हैं ! मन के वश में होते ही थोड़ी सी पूजा भी अनंत फलदाई होती है