-: अक्षय तृतीया महापर्व :-
                 

देखिये हिन्दू संस्कृति की महानता हमारे ऋषि मुनियों ने वेदों शास्त्रों का सरलीकरण करके हम कलियुग के अबोध सद्गृहस्थों को मुक्ति एवं सुख-शांति प्राप्त करने के अनेक मार्ग बताये हैं उनमें मुख्या है वैशाख शुक्ल तृतीया “अक्षय तृतीया”

का महापर्व ! यह त्रेता युग के प्राम्भ तिथि भी है भगवान् श्री राम सूर्यवंशी हैं इसी दिन की महत्ता के कारन महाभारत काल में भगवान् श्री कृष्ण जी ने द्रोपदी जी को “अक्षय” पात्र कह कर एक बर्तन इस आशीर्वाद के साथ दिया था की यह पात्र के रहते कभी आपके भण्डार रिक्त नहीं होंगे अतः कठिन से कठिन स्थिति में भी द्रोपदी जी को जन सेवा अतिथि सेवा में रूकावट नहीं आई ! इस वर्ष यह पावन पर्व शुभ समय 18 अप्रेल बुधवार को आ रहा है इसी परिपाटी का पालन करते हुए हम भी अपने घर में अक्षय पात्र की स्थापना कर सकते हैं इसके लिए आपको कुछ पूजा पाठ करनी है जिसकी विधि इस प्रकार है :-

ताम्बे या पीतल का कोई बर्तन घर लाकर रखें जो आप की तिजोरी में स्थापित हो सके इस दिन प्रातः श्नान करके सर्वप्रथम अपने दिवंगत पितरों को अन्न-जल अर्थात तर्पण-श्राद्ध से तृप्त करें (तर्पण-श्राद्ध विधि के लिए हमारी वेबसाइट पर जाकर जानकारी प्राप्त करें )पूजा स्थल पर बैठ जायें पीले वस्त्र पर पात्र को स्थापित कर लें केशर-कुमकुम के घोल से पात्र में स्वस्तिक बना लें धुप-दीप जला लें किशमिश एवं खरबूजे का फल नैवेद्य स्वरूप दक्षिणा सहित रख लें स्वस्तिक पर सर्व देव पूजन करें श्री सूक्त की सोलह ऋचाओं से सोलह उपचार के द्वारा माँ महालक्ष्मी जी का इसमें पूजन करें फिर 16-16 साबुत सफेद चावल श्री सूक्त के सोलह पाठ के साथ पात्र में डाल दें फिर ॐ ह्रीं कुबेराय नमः मन्त्र के साथ कुबेर भगवान् जी का इसी पात्र में पंचोपचार पूजन करें 4 लोंग+4 इलाइची दक्षिणा अर्पण करें दक्षिणा में सोने/चांदी/ताम्बे या जो भी उपलब्ध हो कोई भी सिक्का अर्पण करें सदा इसी में पड़ा रहने दें !! माँ से प्रार्थना करते हुए कुछ जमा पूँजी से नित्य खर्चे के पैसे इस में डाल दें घर में बरकत रहे इसी कामना के साथ इस अक्षय-पात्र को तिजोरी में रख दें नित्य प्रति इसी में धन रखें इसी से खर्च करें !! आज समाज में यह बात फ़ैल रही है की इस दिन सोना-चांदी-गाड़ी अवश्य खरीदें ऐसा आवश्यक नहीं है परन्तु इस तिथि या मुहूर्त को अबूछ मुहूर्त (स्वयं सिद्ध ) के रूप में जाना जाता है अतः कुछ भी खरीददारी या अन्य कार्य आरंभ करने के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त है !!

इस दिन किसी भी शास्त्रोक्त शुभ कर्म का अक्षय फल होता है अतः ॐ गं गणपतये नमः + ॐ हं हनुमते नमः + गायत्री मन्त्र + नवार्ण मन्त्र + ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं  महालक्ष्मी नमः + नवार्ण मन्त्र + ॐ ह्रां ह्रीं ह्रों रूद्र मूर्तये काल भैरवाय नमः सभी मन्त्रों की एक-एक माला कम से कम जाप करें मूल महालक्ष्मी मन्त्र का यथा संभव अधिक से अधिक जाप करें यथा सामर्थ्य अन्न-धन-फल-दक्षिणा-विद्या दान करें !! हरी ॐ तत्सत !!